पश्चिम एशिया युद्ध: सरकार ने बुलाई सभी दलों की बैठक, राहुल गांधी का बहिष्कार

पश्चिम एशिया युद्ध: सरकार ने बुलाई सभी दलों की बैठक, राहुल गांधी का बहिष्कार

पश्चिम एशिया संकट के तेज़ होते हुए, भारतीय सरकार ने आज एक ऐतिहासिक सांसदों की मंडली में सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाई। 25 मार्च, 2026 को दोपहर 5 बजे आयोजित इस बैठक में देश की आर्थिक और सुरक्षा गड़बड़ियों पर चर्चा हुई। लेकिन असली धूम उस वक़्त छिड़ी जब राहुल गांधी, लोक सभा में विपक्ष के नेता, मौजूद नहीं रहे। यह तस्वीर सामने आई है जब दूसरी ओर प्रधानमंत्री ने इकाई और संवाद की पुकार दी थी।

संकट और सरकार की पहल

दिल्ली में संसद kompleks परिसर में यह बैठक महत्वपूर्ण थी। रक्षा मंत्री राजनारायण सिंह, रक्षा मंत्री ने अध्यक्षता की। बाहर से यह लगा था कि मामला सिर्फ बैठक तक ही सीमित है, लेकिन जमीन पर स्थिति कुछ और थी। चौथे हफ्ते में पहुँचे इस संघर्ष में अब अमेरिका, इजराइल और ईरान जैसे बड़े खिलाड़ी शामिल हैं। 28 फरवरी को हुए उस हमले के बाद से स्थिरता टूटी थी जिसमें अयातोल्ला علی खमेनेई की मौत हुई थी। इसके ठीक बाद से क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही 24 मार्च को लोक सभा में कहा था कि देश को लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने जोर दिया कि ऊर्जा आपूर्ति और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना प्राथमिकता है। यहाँ तक कि लगभग एक करोड़ भारतीय गल्फ में काम कर रहे हैं और समुद्री मार्ग भी प्रभावित हैं। मोदी ने कहा, "ऐसी बारबर में संसद से एक आवाज़ निकली चाहिए।" यह बात साफ़ बताती है कि केंद्र कैसे अपनी विदेश नीति को एकत्रित करना चाहता है।

विपक्षी शिविर में असंतोष

लेकिन विपक्षी शिविर से इस बात की आशा कम थी। कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जून खर्गे, राज्य सभा में विपक्ष के नेता मौजूद थे, लेकिन उनकी पार्टी का मुख्य चेहरा राहुल गांधी कर्णाटक के कार्यक्रमों में व्यस्त रहे। गांधी ने इसे बुरी तरह लिया और सीधा मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री केवल अमेरिका और इजराइल की बात सुनते हैं। उनकी यह टिप्पणी सीधे तौर पर विदेश नीति की नींव पर सवाल खड़ी करता है। उनका कहना था कि किसानों और देश की भलाई से ऊपर सबकुछ छोड़ दिया गया है।

उन्होंने कोविड महामारी का ज़िक्र भी किया और कहा कि पीएम ने वो दर्द भुला दिया है। यह आरोप तंगियाँ दिखाता है कि कैसे एक राष्ट्रीय संकट भी पार्टीगत झुकाव बन जाता है। दूसरी ओर, कैबिनेट में सूत्रों ने बताया कि बैठक में अन्य दलों ने सरकार के कदमों का समर्थन किया। लेकिन यह सहमती राहुल के न होने की वजह से अधूरी लग रही थी।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

संयोग से यह समय बहुत नाजुक है। गल्फ देश में रह रहे कारीगरों के घरों में डर छाया हुआ है। उन्हें वापसी का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही भारत की तेल आपूर्ति के रुकने का डर बना रहता है। सरकार ने इन्हीं मुद्दों को लेकर विशेष समिति गठित की है जो पेट्रोलियम और खाद आपूर्ति पर नजर रखेगी। S. जैशांकर, बाहरी मामलों के मंत्री ने यह कार्यकारी समूहों को निर्देश दिए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव बढ़ा तो मुद्रास्फीति 7% से ऊपर जाने का खतरा है। 10 लाख से अधिक भारतीय नौसैनिकों की सुरक्षा का सवाल भी उठ रहा है। इसलिए यह बैठक सिर्फ राजनीतिक नहीं थी, बल्कि इसमें आम नागरिक की सुरक्षा भी शामिल थी।

क्या आगे देखना है?

क्या आगे देखना है?

अब गौर करें कि इसकी असली ताक़त क्या होगी। सुरक्षा रक्षा का सर्वोच्च स्तर पर फिर से सैंपलिंग किया गया है। जनरल अनिल चौहान जैसी प्रमुख सैन्य अधिकारियों ने हाल ही में बैठकों में हिस्सा लिया है। ये बातें यह इशारा देती हैं कि देश तैयार है। हालाँकि, विपक्ष द्वारा सवाल पूछे जाने के कारण यह एक लंबी पोलिटिकल बैटल बन सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या इस संकट से भारत की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी?

जी हाँ, पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव सीधे भारत के तेल आयात और मुद्रास्फीति को प्रभावित कर सकता है। सरकार ने इन चुनौतियों को रोके रखने के लिए विशेष समितियां बनाई हैं ताकि आवश्यक उपकरणों और ईंधन की आपूर्ति में कोई व्यवधान न आए।

राहुल गांधी ने बैठक क्यों नहीं भागी?

राहुल गांधी का दावा था कि वे कर्णाटक में एक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में शामिल थे। हालांकि, इसने उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच सवाल खड़े किए क्योंकि वह महत्वपूर्ण सुरक्षा बैठक थी। उनका समझना था कि मोदी सरकार ने फैसले लेने में अमेरिकी हितों को प्राथमिकता दी है।

गल्फ में भारतियों की सुरक्षा कब तक बेहतर होगी?

करीब 1 करोड़ भारतीय वर्तमान में गल्फ में काम कर रहे हैं। सरकार ने समुद्री मार्गों और स्थानीय सुरक्षा प्रोटोकॉल पर नजर रखने के लिए सैन्य तैनाती की योजना बनाई है। हालांकि स्थिरता अभी भी एक बड़ा सवाल है जिसे वैश्विक शांति निर्माण प्रक्रियाओं पर निर्भर किया जा रहा है।

विरोधी पक्षों ने क्या प्रतिक्रिया दी?

मल्लिकार्जून खर्गे सहित कई दलों ने सरकार के कदमों का समर्थन किया। लेकिन कांग्रेस के मुख्यानुवादक ने इस परिस्थिति को एक संरचनात्मक गलती कहा और सरकार की विदेश नीति की आलोचना की। विपक्ष के अनुसार, इस संकट का समाधान केवल संवाद से नहीं मिल सकता।

संघर्ष की अवधि कितनी लंबी होने की उम्मीद है?

वर्तमान संघर्ष अपने चौथे हफ्ते में है और स्थिति अस्थिर बनी हुई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह तब तक बना रहेगा जब तक कि प्रमुख क्षेत्रीय शक्तियां व्यापक शांति सहमतियों पर पहुंच न जाएं। भारत को लंबी तैयारियों के लिए तैयार किया जा रहा है।

Shifa khatun

लेखक के बारे में

Shifa khatun

मैं एक स्वतंत्र पत्रकार हूँ जो भारत में दैनिक समाचारों के बारे में लिखती हूँ। मुझे लेखन और रिपोर्टिंग में गहरी रुचि है। मेरा उद्देश लोगों तक सटीक और महत्वपूर्ण जानकारी पहुँचाना है। मैंने कई प्रमुख समाचार पत्रों और वेबसाइट्स के लिए काम किया है।

टिप्पणि (10)

  1. Mukesh Kumar

    Mukesh Kumar - 26 मार्च 2026

    यह समाचार वाकई चौंकाने वाला है क्योंकि देश के संकट में एकता ज़रूरी है। हम देखते हैं कि कैसे बड़ी बैठकें होती हैं फिर भी कुछ मुख्य नेता दूर रहते हैं। मुझे लगता है कि जनता का दिल तो सरकार के साथ है लेकिन विपक्ष को भी सुनना चाहिए। अगर सब मिलकर बैठेंगे तो समस्याएं कम होंगी। भारत को अभी शक्तियों के बीच संतुलन बनाना होगा। मैं चाहता हूँ कि हमारे नागरिक निडर हों और खुश रहें।

  2. Shraddhaa Dwivedi

    Shraddhaa Dwivedi - 27 मार्च 2026

    वर्तमान स्थिति में जो चर्चा हो रही है वह काफी गंभीर है।

    आर्थिक मंदी का खतरा हमेशा सीमाओं पर बना रहता है।

    सरकार ने जो समितियां बनाई हैं उनका परिणाम देखना बेहद ज़रूरी है।

    गल्फ में तबादीली नहीं होने देनी चाहिए किसी को भी।

    एक करोड़ लोगों की मेहनत के पसीने बेकार नहीं होने चाहिए।

    तेल की कीमतें बढ़ने पर घरों में असर पहले ही दिख रहा है।

    मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के लिए कठोर कदम उठने चाहिए।

    बैंकों को भी इस स्थिति में मदद करनी होगी व्यापारियों को।

    विदेश नीति में हमें अकेले नहीं चलना होगा कभी।

    अमेरिका और ईरान जैसे देशों के रुख पर हमारी नज़रें बनी हैं।

    राहुल गांधी का अनुपस्थित होना राजनीति को और गरम करता है।

    हमें ध्यान देना चाहिए कि संवाद कैसे जारी रहे हर स्तर पर।

    प्रधानमंत्री ने जो कहा था उस पर अब कार्रवाई शुरू हुई है।

    दूसरे पक्ष को भी भागीदार बनने की आवश्यकता महसूस होती है।

    देश की सुरक्षा हमारा सबसे बड़ा प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए।

    मैं मानती हूँ कि आने वाले दिनों में स्थिरता लौटेगी।

  3. Govind Vishwakarma

    Govind Vishwakarma - 29 मार्च 2026

    यह सब politics मात्र है real issue ignore हो रहा है people suffering silently

  4. Jamal Baksh

    Jamal Baksh - 30 मार्च 2026

    राजनीतिक दलों को अपनी जगह समझनी चाहिए वर्तमान संकट के बीच में। हमें एक साझा मंच की जरूरत है जिससे फैसले तेजी से निकाल सकें। सुरक्षा विशेषज्ञों की बातें हमेशा सटीक साबित होती हैं भविष्य में। अगर समुद्री मार्ग बंद हुए तो यह राष्ट्रीय आपदा बन सकता है। इसलिए सबको जागरूक होकर काम करने की आवश्यकता है।

  5. Bhoopendra Dandotiya

    Bhoopendra Dandotiya - 31 मार्च 2026

    इस घटनाक्रम में कई रंग दिखाई दे रहे हैं जो सामान्य नहीं हैं।

    हम देखते हैं कि कैसे एक बैठक सवाल बन गई पूरी दुनिया के लिए।

    राहुल गांधी का बहिष्कार कोई मामूली बात नहीं थी किसी के लिए।

    कर्णाटक के कार्यक्रमों में वे थे लेकिन दिल्ली में मौजूदगी मांगी जाती थी।

    क्योंकि यह देश के हालात से जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।

    हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी निभाता है यह हमें सिखाता है।

    राजनीति में वक्त की चुनौतियां हमेशा उलझन पैदा करती हैं।

    मॉदी जी ने जो कहा वह थोड़ा विभिन्न था किसी के लिए।

    उनका कहना था कि दीर्घकालिक लड़ाई के लिए तैयारी होनी चाहिए।

    ऊर्जा आपूर्ति हमारी जीविका से जुड़ी हुई एक बहुत बड़ी कड़ी है।

    अगर ईंधन मूल्य बढ़ेगा तो किसानों को ही सबसे ज्यादा असर होगा।

    इसलिए किसानों की सुरक्षा को भी हमें फ्रंट लाइन में रखना चाहिए।

    कोविड के बाद हम दोबारा एक नई चुनौती का सामना कर रहे हैं।

    सरकार ने खाद और पेट्रोलियम के लिए समिति बनानी चाही।

    मैं उम्मीद करता हूं कि सब कुछ अच्छी तरह सुलझ जाएगा जल्द।

  6. Firoz Shaikh

    Firoz Shaikh - 1 अप्रैल 2026

    उपरोक्त व्यक्तियों द्वारा उठाए गए बिंदु काफी सूचक हैं और इन पर विचार करने योग्य हैं। हालांकि यह संदेह भी बना रहता है कि क्या पूरी जानकारी सामने आई है या नहीं। ऐसी स्थितियों में हमें अधिक विशिष्ट डेटा का प्रतीक्षा करनी चाहिए। रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई यह जानना काफी दिलचस्प है। यदि स्थिरता हासिल हुई तो यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।

  7. Uma ML

    Uma ML - 3 अप्रैल 2026

    ye kya bakwaas hai sabko pata hai ki kaun saaf hai aur kaun ganda reh gaya hai

  8. Saileswar Mahakud

    Saileswar Mahakud - 4 अप्रैल 2026

    मैं आपके गुस्से को समझ सकता हूं क्योंकि यह स्थिति वास्तव में बहुत तनावपूर्ण है। ऐसा लगता है कि लोग सच्ची जानकारी चाहते हैं और उन्हें देना सरकार की जिम्मेदारी है। हमें एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए यहाँ तक कि मतभेद होने पर भी। सामूहिक रूप से समस्या हल करनी होगी ताकि कोई पीठ दर्द न महसूस करे।

  9. Rakesh Pandey

    Rakesh Pandey - 5 अप्रैल 2026

    lagta hai sab kuch planned tha shuru se hi ab hum bas dekh rahe hai khel chal raha hai logon ki jaan mar jayegi yeh sab badhai ke liye nahi hai sach mein

  10. aneet dhoka

    aneet dhoka - 5 अप्रैल 2026

    ये सब गद्मिश्रण है जिनका प्लान पूरा होना बाकी है। लोग नहीं जानते कि असली खेल बैकस्टेज पर चल रहा है। मोदी और राहुल दोनों ही पार्ट ऑफ द प्लान हैं किसी और का। हमें इससे बाहर निकलना होगा और सच ढूंढना चाहिए जो छुपा हुआ है।

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