ममता बनर्जी का BJP पर हमला: 90 लाख वोटर्स हटाने का लगाया आरोप

ममता बनर्जी का BJP पर हमला: 90 लाख वोटर्स हटाने का लगाया आरोप

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर शब्दों की जंग तेज हो गई है। ममता बनर्जी, जो मुख्यमंत्री हैं, ने शुक्रवार, 11 अप्रैल 2026 को उत्तर 24 परगना जिले के टेटुलिया में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। चुनाव प्रचार की गर्मी के बीच मुख्यमंत्री ने भाजपा की तुलना एक सांप से कर दी और दावा किया कि सांप पर तो भरोसा किया जा सकता है, लेकिन भाजपा पर कभी नहीं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में 2026 विधानसभा चुनावों को लेकर माहौल काफी तनावपूर्ण है।

कहानी सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं है। ममता बनर्जी ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है कि राज्य में 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) अभियान के जरिए करीब 90 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इन हटाए गए 90 लाख नामों में से 60 लाख हिंदू और 30 लाख मुस्लिम मतदाता थे। (सोचिए, इतने बड़े पैमाने पर नामों का गायब होना लोकतंत्र के लिए कितना बड़ा झटका हो सकता है)। मुख्यमंत्री का सीधा आरोप है कि केंद्र सरकार की कोई भी एजेंसी अब निष्पक्ष नहीं रही और भाजपा ने सभी को 'खरीद' लिया है।

वोटर लिस्ट विवाद और केंद्रीय एजेंसियों पर सवाल

ममता बनर्जी ने अपनी रैली में इस बात पर जोर दिया कि भाजपा का मुख्य उद्देश्य लोगों को विभाजित करना और उन्हें उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करना है। उन्होंने कहा कि जो एजेंसियां निष्पक्ष रूप से काम करने के लिए बनी थीं, वे अब केवल भाजपा की शाखा बनकर रह गई हैं। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि बाहरी ताकतें बंगाल की राजनीतिक शक्ति पर कब्जा करना चाहती हैं और जनता को अपनी वोट की ताकत पहचानकर इन्हें बाहर करना होगा।

बात सिर्फ बंगाल की नहीं थी। मुख्यमंत्री ने असम के चुनावों का जिक्र करते हुए एक चौंकाने वाला दावा किया। उनके मुताबिक, भाजपा को असम के स्थानीय मतदाताओं पर भरोसा नहीं था, इसलिए उन्होंने चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए बाहरी राज्यों से लोग मंगवाए। बनर्जी ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश से करीब 50,000 लोगों को एक पूरी ट्रेन के जरिए असम भेजा गया। यह दावा उस समय आया जब असम में एक चरण में मतदान संपन्न हुआ था।

असम NRC और मतदाता सूची का कनेक्शन

बनर्जी ने असम के NRC प्रक्रियाAssam

और वहां की 126 सदस्यीय विधानसभा के चुनावों के बीच समानताएं खींचीं। उन्होंने दावा किया कि असम में भी 19 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए, जिनमें से 13 लाख हिंदू और 6 लाख मुस्लिम थे। यह उदाहरण देकर उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि यह भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति है।

भाजपा की जवाबी कार्रवाई और 'विश्वास पत्र'

राजनीति में एक तरफ से वार होता है, तो दूसरी तरफ से पलटवार तय है। उसी दिन, 11 अप्रैल 2026 को, अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के देवरा में एक रैली की। केंद्रीय गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ममता बनर्जी को बंगाल की जनता की कोई परवाह नहीं है। शाह ने सीधा हमला करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का एकमात्र लक्ष्य अपने भतीजे अभिशेक बनर्जी को राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनाना है।

दिलचस्प बात यह है कि इसी रैली के दौरान भाजपा ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी किया, जिसे उन्होंने 'विश्वास का पत्र' नाम दिया है। जहां एक तरफ ममता बनर्जी 'भरोसे' की कमी की बात कर रही थीं, वहीं भाजपा ने इस दस्तावेज़ के जरिए जनता से भरोसा जीतने की कोशिश की।

लोकतंत्र पर प्रभाव और विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वोटर लिस्ट से लाखों नामों के हटने का दावा अगर सच होता है, तो यह चुनावी निष्पक्षता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। हालांकि, अभी तक चुनाव आयोग की ओर से इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह मुकाबला अब केवल विकास के मुद्दों पर नहीं, बल्कि संस्थागत अखंडता और पहचान की राजनीति पर सिमट गया है।

यहाँ कुछ मुख्य बिंदु दिए गए हैं जो इस पूरे विवाद को स्पष्ट करते हैं:

  • दावा: पश्चिम बंगाल में 90 लाख वोटर्स के नाम हटाए गए।
  • विभाजन: 60 लाख हिंदू और 30 लाख मुस्लिम मतदाताओं का जिक्र।
  • असम एंगल: 50,000 लोगों को यूपी से असम भेजने का आरोप।
  • राजनीतिक वार: अमित शाह द्वारा अभिषेक बनर्जी के उत्तराधिकार का मुद्दा उठाना।
आगे क्या होगा?

आगे क्या होगा?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 अब दो चरणों में होने वाले हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या तृणमूल कांग्रेस इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग के पास जाएगी या फिर यह सिर्फ चुनावी माहौल बनाने की एक रणनीति है। जिस तरह की कड़वाहट दोनों पक्षों के बयानों में दिख रही है, उससे साफ है कि यह मुकाबला बेहद कांटे की टक्कर होने वाला है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी ने भाजपा की तुलना सांप से क्यों की?

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर भरोसा न करने की अपील करते हुए यह तुलना की। उनका तर्क है कि भाजपा एक अविश्वसनीय पार्टी है और उसके वादे झूठे होते हैं, इसलिए सांप पर भरोसा करना भाजपा पर भरोसा करने से बेहतर है।

वोटर लिस्ट से नाम हटाने का आरोप क्या है?

ममता बनर्जी का दावा है कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभियान के दौरान पश्चिम बंगाल में 90 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिसमें 60 लाख हिंदू और 30 लाख मुस्लिम शामिल हैं, ताकि चुनाव परिणामों को प्रभावित किया जा सके।

अमित शाह ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाया?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केवल अपने परिवार के हितों की रक्षा कर रही हैं और उनका मुख्य उद्देश्य अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को मुख्यमंत्री बनाना है, न कि जनता की सेवा करना।

असम चुनाव के संबंध में क्या दावे किए गए?

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए उत्तर प्रदेश से 50,000 लोगों को ट्रेनों के जरिए असम भेजा। साथ ही उन्होंने बताया कि असम NRC प्रक्रिया के दौरान 19 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे।

भाजपा का 'विश्वास पत्र' क्या है?

यह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भाजपा का आधिकारिक घोषणापत्र (Manifesto) है, जिसे पार्टी ने जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और विश्वास जताने वाले दस्तावेज़ के रूप में पेश किया है।

Shifa khatun

लेखक के बारे में

Shifa khatun

मैं एक स्वतंत्र पत्रकार हूँ जो भारत में दैनिक समाचारों के बारे में लिखती हूँ। मुझे लेखन और रिपोर्टिंग में गहरी रुचि है। मेरा उद्देश लोगों तक सटीक और महत्वपूर्ण जानकारी पहुँचाना है। मैंने कई प्रमुख समाचार पत्रों और वेबसाइट्स के लिए काम किया है।

टिप्पणि (13)

  1. Senthilkumar Vedagiri

    Senthilkumar Vedagiri - 15 अप्रैल 2026

    ये सब तो बस एक पर्दा है भाई! असली खेल तो पर्दे के पीछे चल रहा है। 90 लाख नाम हटाना कोई छोटी बात नहीं है, ये कोई बहुत बड़ी साज़िश है ताकि चुनाव का रिज़ल्ट पहले ही फिक्स किया जा सके। और वो यूपी से लोग मंगवाने वाली बात? बिल्कुल सही है, क्योंकि इन्हें पता है कि लोकल लोग इनकी असलियत जानते हैं। ये सब डेटा मैनिपुलेशन है और हमें इसे समझना होगा वरना हम सब बस मोहरे बनकर रह जाएंगे। सच तो ये है कि लोकतंत्र अब बस एक मज़ाक बन गया है और कोई भी एजेंसी निष्पक्ष नहीं रही, सब बिक चुके हैं। 😵

  2. Raman Deep

    Raman Deep - 17 अप्रैल 2026

    सब ठीक हो जायेगा बस शांति बनी रहे 🙏✨ उम्मीद है की सच सामने आयेगा और सबको सही न्याय मिलेगा!! 😊

  3. SAURABH PATHAK

    SAURABH PATHAK - 17 अप्रैल 2026

    भाई, तुम लोगों को पता भी है SIR अभियान क्या होता है? इसे ऐसे नहीं समझा जाता। ये बस रूटीन अपडेट होता है जिसमें डुप्लीकेट एंट्रीज़ हटाई जाती हैं। अब ममता जी को राजनीति करनी है तो ठीक है, लेकिन जनता को गुमराह करना गलत है। मैंने खुद इस सिस्टम के बारे में पढ़ा है और ये इतना सिंपल है कि कोई भी समझ सकता है अगर थोड़ा दिमाग लगाए।

  4. Mayank Rehani

    Mayank Rehani - 18 अप्रैल 2026

    एlectoral roll का ऐसा विसंगति (discrepancy) वाकई चिंताजनक है। अगर वोटर लिस्ट का डेटाबेस इंटीग्रिटी लेवल गिरता है, तो पूरे चुनाव का आउटकम ही बदल जाएगा। यह एक क्लासिक केस है जहाँ एडमिनिस्ट्रेटिव ओवरलैप और पॉलिटिकल इंटरफेरेंस के बीच की लाइन धुंधली हो गई है। हमें यहाँ एक पारदर्शी ऑडिट की ज़रूरत है ताकि हम यह जान सकें कि डिलीशन का असल पैमाना क्या है।

  5. Priyank Prakash

    Priyank Prakash - 19 अप्रैल 2026

    ओह भाई! क्या तमाशा चल रहा है यहाँ! 😱 एक तरफ सांप वाली बातें और दूसरी तरफ 'विश्वास पत्र'। कसम से, ये तो किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट लग रही है। मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि असली राजनीति इतनी ज्यादा फिल्मी हो सकती है। अब बस ये देखना बाकी है कि कौन किसको धोता है! 😂

  6. Anamika Goyal

    Anamika Goyal - 20 अप्रैल 2026

    इतने सारे लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा देना वाकई बहुत दुखद है। चाहे वो किसी भी धर्म के हों, वोट देना हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है। मैं बस यही सोच रही हूँ कि जिन लोगों के नाम हट गए, उन्हें अब अपनी पहचान साबित करने के लिए कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। उम्मीद है कि चुनाव आयोग इस मामले में हस्तक्षेप करेगा और सबको उनका हक वापस दिलाएगा।

  7. Prathamesh Shrikhande

    Prathamesh Shrikhande - 22 अप्रैल 2026

    सबकी बातें सुनकर ऐसा लग रहा है कि बंगाल में वाकई बहुत तनाव है 😟 बस सब शांति से निपट जाए ❤️

  8. shrishti bharuka

    shrishti bharuka - 22 अप्रैल 2026

    वाह, क्या गजब का 'विश्वास पत्र' है! 🙄 इतना भरोसा तो मुझे खुद पर नहीं है जितना भाजपा को अपने इस कागज़ के टुकड़े पर है। बहुत ही शानदार रणनीति है, बस नाम बदल दो और सब ठीक हो जाएगा।

  9. Anil Kapoor

    Anil Kapoor - 23 अप्रैल 2026

    आप लोग अभी भी इन बचकाना दावों पर यकीन कर रहे हैं? ममता बनर्जी का पूरा इतिहास ही आरोपों और पलटवारों का रहा है। 90 लाख का आंकड़ा देना बस एक चुनावी स्टंट है ताकि वो सहानुभूति बटोर सकें। जब आप अपनी हार निश्चित देखते हैं, तो आप सिस्टम पर आरोप लगाते हैं। इसे ही कहते हैं हारने वाले की पहचान।

  10. Pradeep Maurya

    Pradeep Maurya - 24 अप्रैल 2026

    हमारी भारतीय संस्कृति में संवाद का बहुत महत्व है, लेकिन आज की राजनीति ने उस मर्यादा को पूरी तरह खत्म कर दिया है। जिस तरह से एक-दूसरे पर व्यक्तिगत हमले किए जा रहे हैं और सांप जैसी तुलनाएं की जा रही हैं, वह समाज के ताने-बाने को कमजोर करता है। बंगाल की धरती, जिसने हमें टैगोर और विवेकानंद दिए, वहां आज ऐसी कड़वाहट देखना बहुत दुखद है। हमें यह समझना होगा कि सत्ता आती जाती है, लेकिन आपसी भाईचारा और देश की अखंडता सबसे ऊपर होनी चाहिए। अगर हम इसी तरह जाति और धर्म के नाम पर बंटे रहेंगे और एक-दूसरे पर झूठे आरोप लगाएंगे, तो हम कभी भी एक विकसित राष्ट्र नहीं बन पाएंगे। राजनीति को सेवा का माध्यम होना चाहिए था, न कि नफरत फैलाने का हथियार। यह समय है कि सभी पक्ष अपनी अहंकार की दीवारें गिराएं और वास्तव में जनता के कल्याण के लिए काम करें, न कि केवल अपनी कुर्सी बचाने के लिए।

  11. Arun Prasath

    Arun Prasath - 25 अप्रैल 2026

    तकनीकी दृष्टिकोण से देखा जाए तो वोटर लिस्ट का संशोधन एक मानक प्रक्रिया है। हालांकि, यदि व्यापक स्तर पर नामों को हटाया गया है, तो इसके पीछे के मानदंडों की समीक्षा की जानी चाहिए। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक मतदाता को अपनी शिकायत दर्ज कराने का अधिकार है। मैं सुझाव दूँगा कि प्रभावित नागरिक आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना नाम जाँचें और आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करें।

  12. Priya Menon

    Priya Menon - 26 अप्रैल 2026

    कितना विडंबनापूर्ण है कि एक तरफ हम लोकतंत्र की बात करते हैं और दूसरी तरफ इतनी घोर नफरत और अविश्वास का माहौल है। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है कि राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह के दावों का उपयोग किया जा रहा है। यदि प्रमाण हैं, तो उन्हें अदालत में पेश करें, न कि रैलियों में चिल्लाकर जनता को भड़काएं। यह मानसिक दिवालियेपन की निशानी है।

  13. saravanan saran

    saravanan saran - 27 अप्रैल 2026

    सब अपनी-अपनी नजर से देख रहे हैं। शायद यही जीवन का सत्य है, हर कोई अपने सच के साथ जी रहा है। चलो देखते हैं कि समय क्या मोड़ लेता है। 🍃

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