अप्रैल 16, 2025 को नरवाना के धर्म सिंह कॉलोनी में रहने वाले सूरज भान की एक लोहे की छड़ से बर्बरतापूर्वक हत्या कर दी गई। घटना एक कारखाने के बाहर हुई, जहां आरोपी राहुल, जो भी उसी कॉलोनी में रहता है, ने अचानक हमला कर दिया। घायल होकर जमीन पर गिरे सूरज भान को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी मौत पहले ही हो चुकी थी। इस हत्या के बाद राहुल ने फरार होने का फैसला किया—लेकिन दो दिन बाद, उसे नरवाना पुलिस की विशेष टीम ने एक सूचना के आधार पर गिरफ्तार कर लिया।
पीछे का दर्द: एक विवाद जो खून से खत्म हुआ
यह हत्या केवल एक अचानक झगड़े का नतीजा नहीं थी। जांच में पता चला कि राहुल के मन में सूरज भान की पत्नी के प्रति अनुचित भावनाएं थीं। यह बात पहले भी सामने आ चुकी थी। दोनों आपस में लगातार झगड़ते रहे, और एक बार तो दोनों ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। लेकिन फिर भी जमीनी स्तर पर एक अच्छा नतीजा हुआ—कॉलोनी के बुजुर्गों ने दोनों के बीच शांति स्थापित की, और दोनों ने अपनी शिकायतें वापस ले लीं। लेकिन शांति का यह सतही रूप असली जहर को छुपाए हुए था। राहुल का दिल अब भी उसी औरत की ओर खिंचा हुआ था। और जब उसने देखा कि सूरज भान ने उसके अनुचित व्यवहार को ठुकरा दिया, तो उसका गुस्सा बर्बरता में बदल गया।
जांच का तेज तर्री: कैसे बनी गिरफ्तारी की योजना
नरवाना के डीएसपी अमित कुमार भाटियन और पुलिस अधीक्षक जिंद राजेश कुमार के नेतृत्व में गठित आपराधिक जांच एजेंसी (सीआईए) की टीम ने घटना के तुरंत बाद जांच शुरू कर दी। एक अहम बात यह थी कि राहुल ने घटना के बाद नरवाना से बाहर छिपने की योजना बनाई थी। लेकिन उसकी एक अहम गलती हुई—वह अपने एक जानिवार के साथ मिलने के लिए नरवाना लौटने की योजना बना रहा था।
सीआईए की जासूसी नेटवर्क ने इस जानकारी को पकड़ लिया। एक गुप्त सूत्र से मिली जानकारी के आधार पर टीम ने एक जाल बिछाया। वे उस जगह पर तैनात हो गए जहां राहुल आने वाला था। और फिर... जैसे ही राहुल अपनी कार से उतरा, तीन पुलिस अधिकारी उसके चारों ओर घेर लिए। उसने कोई विरोध नहीं किया। शायद वह जानता था कि इस बार उसका बचना नहीं होगा।
कोर्ट में उपस्थिति और एक दिन की पुलिस हिरासत
गिरफ्तारी के बाद राहुल को तुरंत कोर्ट में पेश किया गया। न्यायाधीश ने उसे एक दिन के लिए पुलिस हिरासत में दे दिया। इस दौरान पुलिस उससे यह पूछना चाहती है कि क्या कोई और इस हत्या में शामिल था? क्या कोई उसे आश्रय दे रहा था? क्या यह केवल एक व्यक्तिगत बदला था, या इसके पीछे कोई बड़ा साजिश थी?
सूत्रों के मुताबिक, राहुल ने अभी तक कोई गहरी जानकारी नहीं दी है। वह बस इतना कह रहा है कि "मैंने अकेले ही किया।" लेकिन पुलिस को यकीन है कि उसके बयान में खालीपन है। उसके मोबाइल के लॉग, घर के कैमरे और बाजार के सीसीटीवी फुटेज की जांच अभी चल रही है।
परिवार का दर्द, समाज का गुस्सा
सूरज भान की पत्नी अभी तक बोल नहीं पा रही है। उनके बच्चे अभी छोटे हैं। घर में अब सिर्फ एक खालीपन है। उनके परिवार ने जिंद पुलिस स्टेशन पर जाकर न्याय की गुहार लगाई है। कॉलोनी के लोग भी अब अपने आसपास के लोगों को अलग-थलग कर रहे हैं। एक बुजुर्ग ने कहा, "हमने शांति की कोशिश की थी, लेकिन शांति का नाम लेकर जो लोग अपना दिल बदलते हैं, उनके लिए अब सिर्फ एक ही सजा हो सकती है—मौत।"
क्या यह बस एक व्यक्तिगत घटना है?
हरियाणा के कई जिलों में पिछले दो सालों में लगभग 17 ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पत्नी के प्रति अनुचित आकर्षण के कारण घातक हिंसा हुई। इनमें से अधिकांश मामलों में आरोपी ने शुरू में शांति की बात कही, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं किया।
सामाजिक कार्यकर्ता अनिल सिंह का कहना है: "हमारे समाज में अक्सर यह भावना होती है कि एक औरत का दिल उसके पति के अधीन होता है। यह विचार जब एक अन्य व्यक्ति के दिमाग में घुस जाता है, तो वह अपने अहंकार के लिए खून बहाने को तैयार हो जाता है।"
अगला कदम: क्या अब न्याय होगा?
राहुल के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 34 (सामूहिक दोष) के तहत मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। अगले 72 घंटे में पुलिस उसके फोन के डेटा, घर के सीसीटीवी और उसके संपर्क में आए लोगों की जांच करेगी। यदि कोई और आरोपी सामने आता है, तो मामला और भी गहरा होगा।
एक वकील जो इस मामले की निगरानी कर रहे हैं, उन्होंने कहा: "यह मामला अब सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक सवाल बन गया है। हमारी आदतें बदल रही हैं, लेकिन हमारे विचार अभी भी पुराने हैं।"
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राहुल को क्यों दो दिन बाद गिरफ्तार किया गया?
राहुल ने हत्या के बाद तुरंत फरार होने की कोशिश की, लेकिन उसकी एक गलती हुई—वह अपने एक जानिवार से मिलने के लिए नरवाना लौटने की योजना बना रहा था। सीआईए की गुप्त सूचना नेटवर्क ने इस जानकारी को पकड़ लिया और उसे जाल में फंसा दिया। इसलिए दो दिन का समय लगा।
हत्या का मोटिव क्या था?
पुलिस की जांच में पता चला कि राहुल के मन में सूरज भान की पत्नी के प्रति अनुचित भावनाएं थीं। यह विवाद पहले भी हुआ था, और दोनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में समुदाय की मध्यस्थता से शांति हुई, लेकिन राहुल का दिल अब भी उसी औरत की ओर था। जब सूरज भान ने उसके व्यवहार को रोका, तो उसने हत्या कर दी।
क्या कोई और इस हत्या में शामिल है?
अभी तक राहुल ने कोई और नाम नहीं बताया है, लेकिन पुलिस उसके फोन, घर के कैमरे और बाजार के सीसीटीवी की जांच कर रही है। अगर कोई और उसकी मदद कर रहा था—जैसे आश्रय देने वाला या उसे बचाने के लिए योजना बनाने वाला—तो उसके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हो सकता है।
इस तरह की हत्याएं हरियाणा में क्यों बढ़ रही हैं?
पिछले दो सालों में हरियाणा के 17 जिलों में ऐसे 17 मामले सामने आए हैं जहां पत्नी के प्रति अनुचित आकर्षण के कारण हत्या हुई। इनमें से अधिकांश में आरोपी ने शुरू में शांति का दावा किया, लेकिन बाद में अहंकार और नियंत्रण की भावना ने उन्हें हत्या के लिए प्रेरित किया।
Vishala Vemulapadu - 5 फ़रवरी 2026
ये सब तो बस एक आदमी के दिमाग का बीमार होना है। पत्नी को अपनी संपत्ति समझना बंद करो, वो इंसान है, चीज नहीं।
pradeep raj - 7 फ़रवरी 2026
इस मामले में सामाजिक संरचना का एक गहरा अध्ययन आवश्यक है। जब हम एक व्यक्ति के अहंकार को नियंत्रित करने के बजाय, उसके भावनात्मक असंतुलन को सामाजिक समायोजन के रूप में ठीक करने की कोशिश करते हैं, तो वह अस्थायी शांति का निर्माण करता है, जो वास्तविक जहर को दबाए रखता है। यह एक प्रकार का व्यवहारिक अस्थिरता है जिसका अंतिम परिणाम घातक हो सकता है। यहाँ शांति की मध्यस्थता ने वास्तविक समाधान को रोक दिया।
M Ganesan - 9 फ़रवरी 2026
ये सब बस एक बड़ा षड्यंत्र है। पुलिस ने खुद ही इसे बनाया है ताकि लोगों को भ्रमित किया जा सके। राहुल को गिरफ्तार करने के बाद ही सीसीटीवी और फोन डेटा ढूंढने लगे? ये सब फेक है। असली आरोपी तो किसी और ने किया है, और इसे एक आम आदमी के ऊपर चढ़ाया जा रहा है।
ankur Rawat - 11 फ़रवरी 2026
मैं इस बात से सहमत हूँ कि शांति का नाम लेकर बातें करना बहुत आसान होता है, लेकिन दिल की बीमारी को ठीक करना तो बहुत मुश्किल होता है। राहुल के दिमाग में जो विचार घूम रहे थे, वो किसी के लिए बाहर से दिखाई नहीं देते थे। शायद अगर कोई उसके साथ बात करता, बिना फैसला लिए, बस सुनता, तो ये हत्या नहीं होती। हम सब इतने व्यस्त हैं कि दूसरों के दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं।
Vraj Shah - 12 फ़रवरी 2026
ये बात तो सब जानते हैं कि एक आदमी का दिल कितना बदल जाता है अगर वो किसी को चाहने लगे। लेकिन उसे रोकने का तरीका नहीं सीखा जाता। बस बोल दिया जाता है कि अब छोड़ दे। दिल नहीं बदलता, बस धीरे-धीरे बर्बर होता जाता है।
Kumar Deepak - 13 फ़रवरी 2026
हरियाणा में ऐसे मामले 17 बार हुए? यानी हर दो महीने में एक आदमी अपनी पत्नी के लिए किसी को मार रहा है। अरे भाई, यहाँ के लोगों के दिमाग में अभी भी ये सोच है कि औरत का दिल उसके पति के नियंत्रण में होता है। अगर ये सोच बदल नहीं गई, तो अगली हत्या तो बस एक घंटे की बात है।
Ganesh Dhenu - 13 फ़रवरी 2026
एक व्यक्ति के अहंकार को नियंत्रित करने का तरीका नहीं सिखाया जाता। हम सिर्फ उसे रोकने की कोशिश करते हैं, न कि उसके भीतर के जहर को निकालने की। यह एक चिकित्सा समस्या है, न कि एक पुलिस समस्या।
Yogananda C G - 14 फ़रवरी 2026
हर एक ऐसी घटना जो हम देखते हैं, वो सिर्फ एक व्यक्ति की विफलता नहीं है-यह हमारे समाज की असफलता है, जो भावनाओं को अनदेखा करता है, जो शांति के नाम पर झूठ बोलता है, जो दर्द को चुपचाप दबा देता है, और फिर जब वह फूट पड़ता है, तो हम सब चिल्लाते हैं कि ये कैसे हो सकता था? लेकिन अगर हम एक बार भी उस आदमी के साथ बैठकर बात करते, अगर हम उसके अंदर के भय को सुनते, तो शायद आज ये खून नहीं बहता।
Divyanshu Kumar - 16 फ़रवरी 2026
मुझे लगता है कि इस घटना को एक व्यक्तिगत अपराध के रूप में नहीं, बल्कि एक सामाजिक असफलता के रूप में देखना चाहिए। हमारी सामाजिक संरचना अभी भी एक नियंत्रण के आधार पर काम करती है, जहाँ औरत को एक वस्तु के रूप में देखा जाता है। यह विचार नहीं बदला है, बस इसे बेहतर तरीके से छिपाया गया है।
Mona Elhoby - 16 फ़रवरी 2026
अरे भाई, ये तो सब बस एक औरत के लिए लड़ने का नाम लेकर हो रहा है। राहुल ने जो किया, वो गलत था, लेकिन उसकी पत्नी भी तो बहुत बेवकूफ थी। अगर वो इतना आकर्षक न होती, तो ये सब नहीं होता। और अब वो चुप है? बस रो रही है? अरे, ये सब नाटक है।
Arjun Kumar - 17 फ़रवरी 2026
अरे ये सब तो बस एक आदमी के दिमाग का बीमार होना है। लेकिन क्या हम सब इतने निर्दोष हैं? क्या किसी ने कभी उसे बोला कि तुम बहुत अजीब हो? क्या किसी ने उसके साथ बैठकर बात की? या फिर सब ने बस इसे नजरअंदाज कर दिया?
RAJA SONAR - 18 फ़रवरी 2026
मैंने तो ये सब देखा है। जब एक आदमी को अपनी पत्नी का दिल जीतने में असफल होता है, तो वो दूसरे को मार देता है। ये तो एक जाति का रिवाज है। ये हत्या नहीं, ये एक रिवाज है। अब इसके लिए सजा नहीं, बल्कि एक नए समाज की जरूरत है।